

मुंगेली में भिक्षावृत्ति का बढ़ता जाल:नौनिहालों के हाथों में किताब की जगह कटोरा,प्रशासन की उदासीनता से बढ़ा ‘भीख का कारोबार
मुंगेली/जिला मुख्यालय मुंगेली की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर इन दिनों भिक्षावृत्ति की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। नगर के मुख्य मार्गों,मंदिरों,होटलों और चौक-चौराहों पर भिखारियों की बढ़ती संख्या ने आम नागरिकों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह में महिलाओं और छोटे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है,जिन्हें शिक्षा के अधिकार से दूर रखकर जबरन इस दलदल में धकेला जा रहा है।

शुक्रवार बना ‘कलेक्शन डे’
नगर में भिक्षावृत्ति का स्वरूप अब संगठित होता दिख रहा है। भिखारियों ने सप्ताह के शुक्रवार को एक विशेष दिन के रूप में तय कर लिया है। इस दिन पूरे नगर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इन भिखारियों का हुजूम उमड़ पड़ता है। दुकानदारों का कहना है कि वे न केवल व्यापार में बाधा डालते हैं,बल्कि दुकान में आए ग्राहकों से भी अभद्रता या जिद पर अड़ जाते हैं,जिससे व्यापारियों को ग्राहकों की नाराजगी झेलनी पड़ती है,वही व्यवसायियों द्वारा इन्हें खाने पीने की चीजें या चावल देते हैं तो ये लेने से इंकार करते हुए पैसों की मांग करते हैं
शासन की योजनाओं का लाभ,फिर भी मेहनत से परहेज
स्थानीय नागरिकों के अनुसार,इनमें से अधिकांश लोग शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे पीएम आवास, महतारी वंदन योजना और नि:शुल्क राशन का नियमित लाभ उठा रहे हैं। सरकारी सहायता मिलने के बावजूद,मेहनत-मजदूरी से बचने के लिए इन लोगों ने भीख मांगने को एक सुगम ‘व्यवसाय’ बना लिया है। विडंबना यह है कि अपने स्वार्थ के लिए ये लोग अपने मासूम बच्चों को भी इसी काम में लगा रहे हैं।
सिग्नल और होटलों के बाहर जमावड़ा
नगर के प्रतिष्ठित होटलों और प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल इन भिखारियों के मुख्य ठिकाने बन गए हैं। जैसे ही सिग्नल पर गाड़ियां रुकती हैं,महिलाओं की गोद में लिपटे बच्चे और अन्य छोटे बालक वाहनों को घेर लेते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है,बल्कि राहगीरों को भी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की उदासीनता और पुनर्वास का अभाव
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
- शिक्षा का हनन: जिन बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, वे सड़कों पर हाथ फैला रहे हैं। यह ‘शिक्षा के अधिकार’ (RTE) का सीधा उल्लंघन है।
- पुनर्वास की मांग: नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन को इन लोगों के पुनर्वास के लिए अभियान चलाना चाहिए। जो वास्तव में असहाय हैं,उन्हें शेल्टर होम भेजा जाए और जो इसे धंधा बना चुके हैं,उन पर सख्ती बरती जाए।
“व्यवसायियों को भारी समस्या हो रही है। ग्राहकों के सामने बार-बार हाथ फैलाने से दुकान का माहौल खराब होता है। शासन को इनके बच्चों की शिक्षा और इन परिवारों की काउंसलिंग के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।”
मुंगेली नगर की छवि और नौनिहालों के भविष्य को बचाने के लिए जिला प्रशासन को जल्द ही ‘भिक्षामुक्त शहर’ अभियान चलाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इन बच्चों को स्कूल की चौखट तक नहीं पहुँचाया गया,तो आने वाले समय में यह समस्या और बड़ा रूप ले सकती है।

