
शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करता ग्राम चमारी(रोहरा) का प्रधानपाठक
आचरण पर उठे गंभीर सवाल
जहां एक ओर हमारी संस्कृति में गुरु को भगवान का दर्जा प्राप्त है क्योंकि हमारे जीवन में गुरु ही वह शिक्षक है जो हमें सही ज्ञान देता है,सही रास्ता दिखाता है वैसे भी कहा गया है कि जीवन का नाव बगैर गुरु के पार नहीं लग पाता गुरु बिना जीवन अधूरा माना गया है लेकिन यदि गुरु का आचरण ही खराब या व्यवहार अच्छा नहीं रहा तो शिष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा

ऐसे ही एक मामला जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर चमारी (रोहरा) का सामने आया है जहां पर शासकीय प्राथमिक स्कूल है जहां पर पहली से पांचवीं तक के कक्षा में कुल 26 छात्र छात्राएं पढ़ रहे हैं स्कूल में पढ़ाने के लिए शासन द्वारा दो टीचर नियुक्त किए गए हैं एक प्रधान पाठक दूसरा सहायक शिक्षक के रूप में पदस्थ हैं

जानकारी के आधार पर जब मीडिया की टीम स्कूल पहुंची तो स्कूल में सिर्फ सहायक शिक्षक ही मिली पूछने पर बताया गया कि हमारा प्रधान पाठक इंद्रा सिंह कंवर स्कूल आते ही नहीं कभी कभी स्कूल आते हैं

जब इस बारे में स्कूल के बच्चों और गांव वालों से पूछा गया तब मामला और गंभीर हो गया
बच्चों और अभिभावकों ने बताया कि स्कूल के प्रधान पाठक इंद्रा सिंह कंवर जब भी स्कूल में आते हैं शराब पिए रहते हैं इतना ही नहीं स्कूल में भी शराब पीते हैं और जब बच्चे उन्हें मना करते हैं तो महोदय जी स्कूल का दरवाजा खिड़की बंद कर बच्चों को ही गन्दी गन्दी गाली देकर मारते पीटते हैं यह आरोप स्कूल के बच्चों ने ही प्रधान पाठक पर लगाया है
खास बात यह है कि इन महोदय को किसी का डर नहीं ये अपनी सेवा काल में 3 बार संस्पेंड हो चुके हैं हर बार जान पहचान का फायदा उठा कर अपनी सेवा फिर से बहाल करवा लेते हैं अब ऐसे महोदय को फिर डर किस बात का–??
बच्चों और गांव वालों का प्रशासन से निवेदन है कि ऐसे शिक्षक को यहां से हटा कर दूसरे शिक्षक की व्यवस्था करे ताकि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अच्छे से पढ़ाई कर सकें साथ ही स्कूल में शौचालय बनाने और पानी पीने के लिए पम्प या कोई और व्यवस्था की मांग किए हैं
