
मुंगेली: – घर-घर पहुंच रहा स्वास्थ्य सेवा MMU बना गरीबों का सहारा

2.10 लाख से अधिक लोगों को मिला उपचार, 60 हजार से ज्यादा पैथोलॉजी जांच और करीब 2 लाख हितग्राहियों को निःशुल्क दवाइयों का लाभ
मुंगेली। स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों की चारदीवारी से निकालकर जरूरतमंदों की बस्तियों, मोहल्लों और उनके घरों के करीब पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना मुंगेली जिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के गृह जिले में संचालित तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) गरीब, श्रमिक, बुजुर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए इलाज की आसान और सुलभ व्यवस्था का माध्यम बन रही हैं।
योजना के तहत मुंगेली जिले में अब तक 2 लाख 10 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं, 60 हजार से अधिक निःशुल्क पैथोलॉजी जांच तथा करीब 2 लाख हितग्राहियों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल मेडिकल यूनिट केवल एक वाहन नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने वाली प्रभावी व्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
अस्पताल जाने की परेशानी हुई कम
मोबाइल मेडिकल यूनिट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को बार-बार दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम हुई है। निर्धारित क्षेत्रों और बस्तियों में पहुंचने वाली MMU में मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके बाद चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक पैथोलॉजी जांच और जरूरत के अनुसार निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।
इससे गरीब और श्रमिक परिवारों को इलाज के लिए आने-जाने में होने वाले खर्च और समय की बचत हो रही है। रोज कमाकर परिवार चलाने वाले लोगों के लिए अपने काम से पूरा दिन निकालकर अस्पताल जाने की मजबूरी भी कम हुई है।
जांच, डॉक्टर की सलाह और दवा—एक ही जगह
MMU के माध्यम से मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के साथ आवश्यक पैथोलॉजी जांच की सुविधा भी मिल रही है। जिले में अब तक 60 हजार से अधिक पैथोलॉजी जांच होना इस बात को दर्शाता है कि लोग अपनी स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर जांच कराने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट का लाभ उठा रहे हैं।
वहीं करीब 2 लाख हितग्राहियों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत है। सामान्य बीमारियों के अलावा ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों की नियमित निगरानी और चिकित्सकीय सलाह में भी नजदीकी स्वास्थ्य सुविधा उपयोगी साबित हो रही है।
बुजुर्गों, महिलाओं और श्रमिकों को विशेष राहत
मोबाइल मेडिकल यूनिट की सुविधा का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। बुजुर्गों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिल रही है। महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घर के आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से इलाज कराना आसान हुआ है।
वहीं श्रमिक वर्ग के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी है। रोजाना काम करके परिवार चलाने वाले लोगों को इलाज के लिए दूर अस्पताल जाने और काम छोड़ने की आवश्यकता कम पड़ रही है।
आंकड़े बता रहे योजना की पहुंच
मुंगेली जिले में MMU के माध्यम से अब तक 2.10 लाख से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, 60 हजार से ज्यादा पैथोलॉजी जांच और करीब 2 लाख लोगों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया जा चुका है।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट लोगों को उनके नजदीक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। खासकर उन परिवारों के लिए, जिनके पास इलाज के लिए समय, पैसा या नियमित रूप से अस्पताल जाने की पर्याप्त सुविधा नहीं होती, MMU एक सुविधाजनक विकल्प बनकर सामने आई है।
‘इलाज लेने नहीं, इलाज देने’ की व्यवस्था
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की मूल भावना ही यह है कि स्वास्थ्य सुविधा केवल अस्पताल तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंदों तक स्वयं पहुंचे। मुंगेली में संचालित तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट इसी सोच को जमीन पर साकार करती दिखाई दे रही हैं।
आज कई परिवारों के लिए MMU एक ‘चलता-फिरता स्वास्थ्य केंद्र’ बन चुकी है, जहां स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय सलाह, पैथोलॉजी जांच और आवश्यक दवाइयों जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं।
स्वास्थ्य सुविधा अब लोगों के करीब
मुंगेली में मोबाइल मेडिकल यूनिट की पहल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने के साथ यह संदेश भी दे रही है कि अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था वही है, जो जरूरतमंद व्यक्ति को सुविधा पाने के लिए हमेशा अस्पताल तक पहुंचने पर मजबूर न करे, बल्कि स्वास्थ्य सेवा स्वयं उसके करीब पहुंचे।
2.10 लाख से अधिक लोगों का उपचार, 60 हजार से अधिक जांच और करीब 2 लाख हितग्राहियों को निःशुल्क दवाइयां—मुंगेली में MMU की यह उपलब्धि बताती है कि ‘इलाज लेने नहीं, इलाज देने’ की सोच अब जमीन पर असर दिखा रही है।
